Saturday, October 16, 2021
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Health Tips : पीरियड्स के दौरान होने वाले शारीरिक परिवर्तन और अन्य चीजों के तथ्य से आप अनजान हैं तो जानिए इसके बारे में

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Health Tips: पीरियड्स को माहवारी, महीना, मेंस्टुअल साइकिल, एमसी या रजोधर्म आदि नाम से जाना जाता है। औरत के अंदर उनके शरीर में हार्मोन के बदलाव के वजह से पीरियड्स आते हैं।

नई दिल्ली। Health Tips: पीरियड्स नियमित रूप से प्राकृतिक परिवर्तन होता है जो महिला प्रजनन प्रणाली में होता है जो प्रेगनेंसी को संभव बनाता है। यह चक्र गर्भावस्था के लिए गर्भाशय की तैयारी और अंडाशय में अंडों को बनाने का काम करता है। पीरियड्स इस चक्र का हिस्सा होते हैं। औरतों के अन्दर उनके शरीर में हार्मोन के बदलाव की वजह से योनि से रक्तस्राव होता है, इसे पीरियड्स कहते हैं।

पीरियड्स आमतौर पर हर महिला के जीवन की एक आम प्रक्रिया है। यह सिर्फ प्रजनन के लिए ही जरूरी नहीं होता बल्कि यह स्वास्थ्य के बारे में भी बताता है। पीरियड्स सबको एक ही उम्र में नहीं होता। कुछ लड़कियों को 12 या 13 साल की उम्र में पहला पीरियड्स होता है तो कुछ लड़कियों को 10 या 13 वर्ष की उम्र में शुरू हो जाता है। पीरियड्स महीना में एक बार आता है। यह चक्र सामान्य तौर पर 28 से 35 दिनों का होता है। जब महिला जब तक गर्भवती न हो जाए यह प्रक्रिया हर महीने होती हैं। मतलब 28 से 35 दिनों के बीच नियमित तौर पर पीरियड्स होती हैं। आइए जानते हैं पीरियड्स से जुड़ी कुछ जरूरी बातों के बारे में जिसके बारे में जानना हर महिला के लिए जरूरी है।

१. पीरियड्स का रक्त गंदा होता है

कई लोग पीरियड्स के रक्त हो गंदा मानते हैं लेकिन ऐसा नहीं है। यह गर्भाशय की पुरानी ऊतक कोशिकाओं, योनि तथा सर्विक्स के स्राव और रक्त का मिश्रण होता है। यह अपनी बनावट और अन्य गुणों के कारण सामान्य रक्त से थोड़ा अलग होता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पीरियड का रक्त गंदा या अशुद्ध होता है।

२. पीरियड्स के दौरान प्रेगनेंसी नहीं होना

ये पूरी तरह सच नहीं है। सेक्स के दौरान अगर स्पर्म वजाइना के अंदर रह जाए तो वह सात दिनों तक जिंदा रहते हैं यानी अगले सात दिनों तक प्रेगनेंसी का मौका होता है इसलिए पीरियड के दौरान भी कंडोम का इस्तेमाल करना जरूरी है।

३. पीरियड्स के दौरान शरीर में परिवर्तन

पीरियड्स के दिनों में महिलाओं के शरीर में कुछ बदलाव देखते हैं जिनकी वजह से उनके लुक में फर्क आ जाता है इस दौरान पेट में सूजन सी दिखती है क्योंकि पीरियड्स के दिनों पेट का आकार तिकोन जैसा हो जाता है पीरियड्स के दिनों में ही ब्रेस्ट का आकार बढ़ता है।

४. पीरियड्स के दौरान मीठा खाने की इच्छा

महिलाओं को पीरियड्स के दौरान मीठा खाने की बहुत इच्छा होती है। इसलिए ऐसे में उन्हें डार्क चॉकलेट का सेवन करना चाहिए। इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट सेरोटोनिन को बढ़ाता है, जिससे मूड बेहतर होता है। पीरियड्स में डार्क चॉकलेट खाना फायदेमंद हो सकता है।

५. विटामिन और आयरन डाइट में करें शामिल

पीरियड्स के दौरान विटामिन ए युक्त हरी और पत्तेदार सब्जियां डाइट में जरूर शामिल करें ताकि शरीर में खून की मात्रा बढ़ सके। इसके अलावा विटामिन बी6 से भरपूर आलू का सेवन करने से भी खून की थक्कों को कम करने में मदद मिलती है।

६. पीरियड्स के दौरान सेक्स करना ठीक है या नहीं

बहुत से लोगों को लगता है कि पीरियड्स के दौरान सेक्स नहीं कर सकते। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। पीरियड्स में सेक्स करने में कोई दिक्कत नहीं है। बल्कि अधिकतर महिलाओं को इस समय उत्तेजना का अनुभव होता है। लेकिन पीरियड्स में सेक्स करने से पहले कंडोम का इस्तेमाल जरूर करें।

७. पीरियड्स आने के पहले लक्षणों का अनुभव

काफी लोग यह मानते हैं कि पीरियड्स के पूर्व के लक्षण वास्तविक नहीं हैं जबकि ऐसा नहीं है। प्रीमेंसटूअल सिंड्रोम एक वास्तविक स्थिति है जो लगभग 50% महिलाओं को महसूस होती है। इस स्थिति का अनुभव पीरियड्स होने के एक या दो हफ्ते पहले से होने लगता है, जिनमें चिड़चिड़ापन, पेट में दर्द, बेचैनी, घबराहट, भूख न लगना, पैर में दर्द, कमर में दर्द आदि लक्षण प्रमुख है।




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