Tuesday, September 21, 2021
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राष्ट्रीय महिला आयोग की रिपोर्ट में खुलासा, आठ महीने में 46 फीसदी बढ़ा महिला साइबर अपराध

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नयी दिल्ली। आधुनिकता की दौड़ में साइबर अपराध भी रोजाना बढ़ रहे हैं। आए दिन किसी न किसी साइबर अपराध की खबर सामने आ ही जाती है। अकड़ों के मुताबिक महामारी के दौरान लॉकडॉन में साइबर अपराध काफी बढ़ा है।

महिलाओं के खिलाफ साइबर क्राइम में हुई 46 फीसदी की बड़ोत्री:

राष्ट्रीय महिला आयोग की हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 के पहले आठ महीने में महिलाओं के खिलाफ क्राइम के केसेज में 46 फीसदी इजाफा हुआ है। खास बात यह है कि सबसे ज्यादा केस (3,248) तब बढ़े, जब जुलाई में लोग महामारी से जूझ रहे थे।

अपराधी रखते हैं गलत मांगे:

महामारी के दौरान अपराधी महिलाओं का शोषण करने के लिए उन्हें ब्लैकमेल करते थे, एक खबर सामने आई थी जहां साइबर अपराधी ने महिला का फोन हैक कर लिया था और बदले में शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाया था। कुछ और उदाहरण हैं जहा महिलाओं के साथ ऑनलाइन दोस्ती कर रेप जैसी अमानवीय हरकत तक करते है अपराधी।

दरअसल, महिलाए कभी अपराधी के डर से तो कभी समाज के डर से शांत रह जाती है और शिकार बनती रहती है। ऐसे अपराधों में कभी रिपोर्ट नहीं दर्ज होती है तो कभी कानून ऐसी पीड़ित को इंसाफ दिलाने में विफल रहता जाता है। ऐसे में महिलाओं के खिलाफ साइबर क्राइम की चुनौतियों से निपटने के लिए अलग से एक कानून की बात रखी गई है।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने उठाई मांग

महिलाएं आए दिन साइबर क्राइम का शिकार बन रही हैं। ज्यादातर मामलों में महिलाओं को ब्लैकमेल कर डराया जाता है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराधों से निपटने के लिए अलग से कानून लाए जाने की वकालत की है।

साइबर बुलिंग का शिकार होती है महिलाए

साइबर बुलिंग यानी गंदी भाषा, तस्वीरों या धमकियों से इंटरनेट पर तंग करना, साइबर स्टॉकिंग समेत साइबर क्राइम के मामले आय दिन बढ़ रहे हैं। युवा लड़कियों को इंटरनेट पर बुली किया जाता है, उनके कपड़ों और बदन को लेकर अभद्र टिप्पटियां की जाती है। कानून के जानकारों का भी कहना है कि बदलते माहौल के हिसाब से नया कानून लाया जाना चाहिए।

क्या कहती है रिपोर्ट?

राष्ट्रीय महिला आयोग की रिपोर्ट के हिसाब से 2021 के पहले आठ महीने में महिलाओं के खिलाफ क्राइम के केसेज में 46 फीसदी इजाफा हुआ है। इसमें कहा गया है कि 2020 में इसी अवधि के दौरान 13,618 केस सामने आए, जबकि इन आठ महीने में 13,618 शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं।

2013 में आईपीसी में किया गया संशोधन

आपको बता दें कि जब मोबाइल या कंप्यूटर पर इंटरनेट के जरिए अश्लील हमला किया जाता है, जिससे महिला की गरिमा को ठेस पहुंची हो तो उसे महिला के खिलाफ साइबर अपराध माना जाता है। 2013 के पहले महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराधों से निपटने के लिए कोई कानून नहीं था, मगर 2013 में आपराधिक संशोधन अधिनियम के जरिये भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) , 1860 की धारा 354 ए से लेकर धारा 354 डी जोड़ा गया।

ये है कुछ मुख्य धाराएं

धारा 354 ए: तीन साल तक सख्त कारावास

यौनेच्छा की मांग करना या महिला की इच्छा के खिलाफ पोर्नोग्राफी दिखाना, या अभद्र टिप्पणी करना, ऐसे सभी मामले यौन उत्पीड़न की श्रेणी में माने जाएंगे। ऐसे मामलों में तीन साल तक का कड़ा कारावास, जुर्माना या फिर दोनों हो सकता है।

धारा 354 बी: गैर जमानती अपराध

इस धारा के तहत किसी महिला को जबरन कपड़े उतारने पर मजबूर करना जैसे अपराध आते हैं। राज कुंद्रा मामले में लड़कियों के साथ ऐसा ही मामला बना है। ऐसे मामलों में कम से कम तीन साल और अधिक से अधिक सात साल की सजा का प्रावधान है। साथ ही यह गैर जमानती अपराध भी है।

धारा 354 सी: सात साल तक की सजा

महिला की निजी गतिविधियों की बिना सहमति के फोटो लेना और उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के मामले में आईपीसी की धारा-354 सी लगती है। दोषी को एक साल से तीन साल तक कैद का प्रावधान है। दूसरी बार दोषी पाए जाने पर 3 साल से 7 साल तक कैद की सजा हो सकती है और यह गैर जमानती अपराध होगा।

धारा 354 डी: साइबर स्टॉकिंग

लड़की या महिला का पीछा करना और कॉन्टैक्ट करने का प्रयास यानी स्टॉकिंग के मामले में आईपीसी की धारा-354 डी के तहत केस दर्ज होगा। इसमें व्हाटसएप, फेसबुक या अन्य सोशल मीडिया पर साइबर स्टॉकिंग भी शामिल है। इस मामले में दोषी को तीन साल तक कैद हो सकती है।

इसके अलावा भी कुछ धाराएं कानून में शामिल है।










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