Friday, October 15, 2021
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जांघ से 17 KG का ट्यूमर निकाला: एक साल से बैठा नहीं था मरीज, सोना तक मुश्किल हो गया था; IGIMS के डॉक्टरों ने 5 घंटे में ऑपरेशन कर निकाला

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पटनाएक घंटा पहले

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बाएं जांघ में पीछे की तरफ 17 किलो का ट्यूमर था।

मुजफ्फरपुर के रहने वाले 57 साल के अनिल कुमार सिंह एक साल से बैठ नहीं पा रहे थे। पीट के बल सोना और चलना भी मुश्किल हो गया था। अनिल के बाएं पैर की जांघ में पीछे की तरफ 17 किलो का ट्यूमर था। ट्यूमर को इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) स्थित राज्य कैंसर संस्थान के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शशि सिंह पवार की टीम ने 5 घंटे के ऑपरेशन में निकाल दिया। ऑपरेशन के बाद अनिल आराम से चल पा रहा है। डॉक्टरों का दावा है कि मेडिकल लिटरेचर में अब तक ऐसा मामला नहीं आया था।

मुख्यमंत्री अनुदान योजना के तहत उठाया गया खर्च
अनिल कुमार सिंह आर्थिक रूप से काफी कमजोर हैं। वे पेशे से किसान हैं। डॉ शशि सिंह पवार का कहना है कि पैसे की तंगी के कारण ही अनिल का इलाज ठीक से नहीं हो पाया। एक साल पहले उन्होंने कहीं सर्जरी कराई थी लेकिन ट्यूमर घटने के बजाए और बढ़ता गया। कोरोना काल में अनिल की आर्थिक स्थिति और खराब हो गई। ऐसे में इलाज नहीं हो पाया। अनिल सारकोमा ट्यूमर से परेशान थे। पिछले महीने वे IGIMS आए तो जांच के बाद ऑपरेशन की सलाह दी गई। अनिल की माली हालत ठीक नहीं थी, इसलिए मुख्यमंत्री अनुदान योजना के तहत उनका ऑपरेशन किया गया।

डॉ शशि सिंह पवार ने बताया कि अनिल अब पूरी तरह से ठीक हैं। अब वे सामान्य लोगों की तरह चल पा रहे हैं। कुछ दिन बाद वे पूरी तरह ठीक हो जाएंगे। पहले की तरह पीठ के बल लेट भी सकेंगे। सोमवार को उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया है। डॉक्टर शशि ने बताया कि सर्जरी में उनके साथ डॉ. मनीष, एनेस्थीसिया टीम से डॉ. विनोद वर्मा, डॉ. मुमताज और डॉ. विभा के सहयोग से 5 घंटे में सर्जरी पूरी हुई। शिवानी और नेहा की नर्सिंग टीम ने सहयोग किया।

दो बार ऑपरेशन नहीं हुआ था सफल
राज्य कैंसर संस्थान में ऑपरेशन करने वाले डॉक्टरों की टीम ने बताया कि सारकोमा ट्यूमर का ऑपरेशन जटिल होता है। अनिल कुमार का मामला तो और जटिल था। वह पहले भी दो बार ऑपरेशन करा चुके थे, लेकिन ठीक होने के बजाए यह बढ़ता ही चला गया। परेशानी बढ़ने पर अनिल ने सर्जिकल ऑन्कोलॉजी ओपीडी में डॉ . शशि सिंह पवार से मुलाकात की।

नस कटती तो काटना पड़ जाता पैर
डॉ शशि का कहना है कि ट्यूमर रक्त वाहिकाओं के करीब था और अपने विशाल आकार के कारण बहुत जटिल हो गया था। रक्त वाहिकाओं को किसी भी तरह की क्षति होती तो पैर काटना पड़ जाता। ऐसे में काफी सावधानी से टीम के साथ ट्यूमर को काटकर अलग किया गया।

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