Saturday, October 16, 2021
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गाजीपुर-सिंघु बॉर्डर लाए जाएंगे किसानों के अस्थि कलश: BKU प्रदेश अध्यक्ष बोले- नेपाल बॉर्डर से सटा होने और पुलिस की नाकेबंदी से नहीं पहुंच पाए तमाम राज्यों के किसान

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गाजियाबाद7 घंटे पहले

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लखीमपुर खीरी के तिकुनिया में अंतिम अरदास स्थल पर बैठे किसान नेता राकेश टिकैत, योगेंद्र यादव और राजवीर सिंह जादौन।

यूपी में लखीमपुर जिले के तिकुनिया से शुरू हुई अस्थि कलश यात्रा पूरे देश में जाएगी। मंगलवार को अंतिम अरदास स्थल से यह यात्रा शुरू हो गई है। जो अस्थि कलश बचे रह गए हैं, वे दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर और सिंघु बॉर्डर पर लाए जाएंगे। यहां से उन्हें राज्य और जनपदवार भेजा जाएगा। कलश यात्रा का स्वरूप कैसा होगा, इस पर ‘दैनिक भास्कर’ ने भारतीय किसान यूनियन के उप्र अध्यक्ष राजवीर सिंह जादौन से विशेष बातचीत की।
पुलिस ने किसानों को रोका, इसलिए वे नहीं पहुंच पाए
राजवीर जादौन ने बताया कि मंगलवार को अंतिम अरदास स्थल पर सभी राज्यों के लिए एक-एक और उत्तर प्रदेश के लिए 75 अस्थि कलश बनाकर तैयार किए गए थे। हमारे तमाम किसानों व प्रमुख नेताओं को पुलिस ने जहां-तहां रोक लिया, इस वजह से वे अंतिम अरदास स्थल पर पहुंच नहीं पाए। अंतिम अरदास स्थल से आठ राज्यों और यूपी के करीब 10 मंडलों को अस्थि कलश जा पाए हैं।

हरियाणा राज्य का अस्थि कलश गुरनाम सिंह चढूनी ने ग्रहण किया।

हरियाणा राज्य का अस्थि कलश गुरनाम सिंह चढूनी ने ग्रहण किया।

बचे रह गए 35 अस्थि कलश मोर्चों पर आएंगे
राजवीर जादौन ने आगे बताया कि अभी करीब 35 अस्थि कलश बचे रह गए हैं। इन्हें 14 अक्तूबर की शाम तक दिल्ली लाया जाएगा। यूपी के अस्थि कलश गाजीपुर बॉर्डर और बाकी राज्यों के अस्थि कलश सिंघु बॉर्डर पर रखे जाएंगे। यहां से उन्हें संबंधित जनपद-राज्यों के लिए भेजा जाएगा।
नेपाल बॉर्डर के नजदीक था अरदास स्थल
प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी माना कि तिकुनिया में अंतिम अरदास स्थल लखीमपुर खीरी जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर था। गांव-देहात और नेपाल बॉर्डर नजदीक होने की वजह से तमाम राज्यों व जिलों के किसान वहां नहीं पहुंच पाए। उनकी सुविधा के लिए बचे हुए अस्थि कलशों को दिल्ली के बॉर्डरों पर लाने का फैसला लिया गया है।

कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी ने भी अंतिम अरदास में पहुंचकर प्रार्थना की।

कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी ने भी अंतिम अरदास में पहुंचकर प्रार्थना की।

जहां-जैसी परंपरा, वैसे ही अस्थियां विसर्जित होंगी
राजवीर सिंह जादौन ने बताया कि सभी जिलों और राज्यों में अस्थि कलश यात्रा का रूट स्थानीय एसकेएम इकाई तय करेगी। जिस जिले में अस्थि विसर्जन का जैसा रिवाज है, उसी अनुसार इन किसानों की अस्थियां भी विसर्जित की जाएंगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तमाम लोग ब्रजघाट में अस्थि विसर्जन करते हैं। कुछ लोग हरिद्वार जाते हैं। इसी प्रकार जहां-जैसी परंपरा है, वैसे ही अस्थियां प्रवाहित होंगी। इन सभी अस्थि कलश यात्राओं का समापन 24 अक्तूबर को होगा।

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