Tuesday, September 21, 2021
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किसान आंदोलन समझौते के क्रेडिट पर झींडा-चढुनी हुए आमने-सामने: HSGPC के पूर्व प्रधान बाेले-पर्दे के पीछे रहकर मैंने करवाया समझौता, चढुनी का जवाब- आए हाए, इन गंदे लोगों का मैं क्या करूं

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करनाल25 मिनट पहले

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HSGPC के पूर्व प्रधान जगदीश झींडा डेरा कार सेवा से समझौता करवाने का एलान करते हुए।

हरियाणा के जिले करनाल में किसान आंदोलन के समझौते के क्रेडिट को लेकर HSGPC के पूर्व प्रधान जगदीश झींडा व भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम चढुनी का आमना-सामना हो गया है। पहले झींडा ने डेरा कार सेवा से एलान किया कि पर्दे के पीदे रहकर मैंने समझौता करवाया है। इसके लिए सभी पक्षों से बातचीत की। इस पर चढुनी ने अपनी टिप्पणी करते हुए गंदे लोग बताया। जिसके जवाब में झींडा ने भी गुरनाम पर आरोप लगाए हैं।

समझौते के इस एलान पर दैनिक भास्कर ने गुरनाम सिंह चढुनी से बातचीत की तो चढुनी बोले – आए हाए, इन गंदे लोगों का मैं क्या करूं। जो न वार्ता में, न एलान में शामिल, फिर भी समझौते का श्रेय। मैंने उन्हें से बातचीत करुंगा।

गुरनाम सिंह चढुनी।

गुरनाम सिंह चढुनी।

चढुनी चाहता इलेक्शन लड़ना, बेईमान आदमी

झींडा चढुनी के बयान के जवाब में बोले – चढुनी से कहता हूं कि हरमिंद्र साहिब गुरुद्वारा में चले जाते हैं। चढुनी से पूछकर ही सरकार से बातचीत की थी। बलविंद्र एमसी के घर आधा घंटा बातचीत की। सरकार से बात करने के लिए कहा। अगली बात ये कहूंगा कि जो मैंने बयान किया, मेरी एक बात भी एक प्रसेंट झूठी नहीं है। मेरा अलजाम है कि चढुनी इलेक्शन लड़ना चाहता है। बेईमान है और लोग कह रहे हैं कुछ लेकर समझौता कर गया।

झींडा का खुलासा – एमसी बलविंद्र के घर की चढुनी से वार्ता

डेरा कार सेवा करनाल में हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (HSGPC) के पूर्व प्रधान जगदीश सिंह झींडा ने कहा कि वे किसानों के आंदोलन को खत्म करवाना चाहते थे। 7 अगस्त व 8 अगस्त की वार्ता में जब बात नहीं बनी तो शाम को समझौता करवाने की सोची। ताकि किसानों का कोई नुकसान न हो। मैनें 1970 सेे भारतीय किसान यूनियन में 14 साल काम किया था। मुझे पता है कि किसानांे का समझौता कैसे करवाना है। घर से गुरुनानक देव के सामने बोला कि जब तक समझौता नहीं होगा तब तक वापस नहीं आउंगा। करनाल आने के बाद भाजपा के नेताओं से बातचीत करके सीएम से संपर्क साधा और उनका पक्ष जाना। इसके बाद गुरनाम सिंह चढुनी से करनाल में बलविंद्र सिंह एमसी के घर पर बातचीत करके तैयार किया। इसके बाद डीसी के पास सचिवालय में गए और सभी पक्षों को समझौते के लिए राजी किया। इसका परिणाम ये हुआ कि कुछ किसान ने अपनी मांगों को बदला और कुछ सरकार झुकी। आखिरकार समझौता हो गया।

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